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| अलीगढ़ में आधा बीघा ज़मीन के लिए खूनी संघर्ष! परिवार को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश, चली गोलियां। |
अलीगढ़। इंसानियत और रिश्तों की मर्यादा क्या ज़मीन के एक छोटे से टुकड़े के आगे खत्म हो गई है? अलीगढ़ के टप्पल इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। यहाँ महज़ आधा बीघा ज़मीन के विवाद में एक हंसते-खेलते परिवार पर जानलेवा हमला किया गया और उन्हें ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया गया।
गेहूं काटकर घर लौटा था परिवार, तभी हुआ हमला
घटना टप्पल थाना क्षेत्र के स्यारौल गांव की है। पीड़ित विनोद के अनुसार, उसके पिता शिवराज सिंह ने गांव में सड़क के किनारे लगभग आधा बीघा खेत खरीदा था। मंगलवार की दोपहर को पूरा परिवार अपने खेत से गेहूं की फसल काटकर घर लौटा था और आराम कर रहा था। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि अगले ही पल उन पर मौत का साया मंडराने वाला है।
घर में घुसकर की गई फायरिंग और ट्रैक्टर से हमले की कोशिश
विनोद का आरोप है कि गांव के ही कुछ दबंग—दशरथ, हरेन्द्र (उर्फ बोना), विष्णु और उनके कुछ साथी—लाठी-डंडे, गंडासा और अवैध हथियार लेकर उनके घर में घुस आए। बिना किसी बात के उन्होंने गालियां देना शुरू किया और परिवार पर हमला बोल दिया।
दबंगों की हैवानियत यहीं नहीं रुकी:
फायरिंग: एक हमलावर ने कट्टे से गोली चलाई, हालांकि खुशकिस्मती रही कि परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए।
ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास: हमलावरों ने घर के बाहर खड़े ट्रैक्टर से परिवार को कुचलने की कोशिश की।
गंभीर चोटें: हमले में शिवराज सिंह के सिर में गहरी चोट आई है और परिवार की एक महिला, अमरावती का घुटना टूट गया है।
ग्रामीणों के आने पर जान बचाकर भागे हमलावर
जब घर के अंदर से चीख-पुकार और गोलियों की आवाज़ आई, तो आस-पास के ग्रामीण मौके पर दौड़े। भीड़ को अपनी तरफ आता देख हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। पीड़ितों को तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
पुलिस की कार्रवाई
थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया है और फरार हमलावरों की तलाश में दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
मेरी राय: क्या मिट्टी का टुकड़ा जान से कीमती है?
एक शिक्षक और एक आम नागरिक होने के नाते यह सोचकर डर लगता है कि समाज किस दिशा में जा रहा है। जिस गांव में लोग एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी होते थे, वहां आज ज़मीन के लिए कट्टे और ट्रैक्टर जैसे हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है। प्रशासन को ऐसे 'रसूखदार' दबंगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह के खौफ से न गुज़रे।
आपकी क्या राय है? क्या ज़मीन के विवादों को सुलझाने के लिए प्रशासन को और अधिक सक्रिय होने की ज़रूरत है? कमेंट में अपने विचार ज़रूर साझा करें।

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