![]() |
| AMU Law Faculty Attendance Dispute 2026 |
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की लॉ फैकल्टी इस वक्त सुलग रही है। 18 अप्रैल को परीक्षा परिणाम क्या आए, 81 छात्रों के लिए भविष्य के दरवाजे ही बंद हो गए। 'हाजिरी की कमी' का हवाला देकर अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा से रोक दिया गया है। इनमें वे मेधावी छात्र भी शामिल हैं जिनका चयन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुआ है। आखिर क्यों प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया? पढ़िए सिस्टम की इस बड़ी चूक की पूरी कहानी।
- बड़ी कार्रवाई: 124 में से 81 छात्र डिटेन; करियर के आखिरी मोड़ पर लगा ब्रेक।
- नियमों की अनदेखी: दिल्ली हाईकोर्ट के 2025 के आदेश (साप्ताहिक हाजिरी सार्वजनिक करना) का उल्लंघन।
- प्रशासनिक लापरवाही: खुले पन्नों (Loose sheets) पर दर्ज हुई हाजिरी; छात्रों को नहीं मिला सुधारात्मक मौका।
- हिंसक झड़प: प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप— प्रॉक्टोरियल टीम ने की मारपीट और अभद्र व्यवहार।
छात्रों के सपनों पर वज्रपात
- जॉब और हायर स्टडीज: कई छात्रों के पास नामी लॉ फर्म्स के PPOs हैं, तो कुछ ने CLAT-PG और सुप्रीम कोर्ट क्लर्कशिप की लिखित परीक्षा पास कर ली है। एक साल बर्बाद होने का मतलब है इन सभी अवसरों का हाथ से निकल जाना।
- AIBE और न्यायपालिका: 30 अप्रैल को ऑल इंडिया बार परीक्षा (AIBE) के रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख है। डिग्री न मिलने पर छात्र जज (Judiciary) बनने के सपने से भी कोसों दूर हो जाएंगे।
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
छात्रों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि उन्हें पूरे साल अटेंडेंस का रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया। जब 18 अप्रैल को परिणाम घोषित हुए, तब अचानक डिटेंशन लिस्ट जारी कर दी गई। 25 छात्रों को तो महज एक विषय में हाजिरी कम होने पर पूरी परीक्षा से वंचित कर दिया गया, जो प्रशासन के 'मनमाने' रवैये को दर्शाता है।

0 Comments