Lucknow Shocking News: Operation Theatre में छात्रा से दरिंदगी! पर 'आयुर्वेदिक' डॉक्टर वहाँ कर क्या रहा था?
सोचिए, आप अपने परिवार के किसी सदस्य को इलाज के लिए अस्पताल ले जाते हैं, और जिस 'रक्षक' के भरोसे आप उसे Operation Theatre (OT) में छोड़ते हैं, वही भक्षक बन जाए! लखनऊ के चर्चित तेजस अस्पताल की यह Viral और Shocking घटना सिर्फ एक क्राइम नहीं है, बल्कि हमारे पूरे मेडिकल सिस्टम पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है।
आखिर तेजस अस्पताल के बंद दरवाजों के पीछे क्या हुआ?
यह खौफनाक दास्तान शुरू होती है लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) इलाके से। यहाँ 19 साल की एक दलित छात्रा को मिर्गी (seizures) की शिकायत के बाद तेजस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इलाज के दौरान आरोपी डॉ. विजय गिरी ने छात्रा को ट्यूब डालने के बहाने अकेले ऑपरेशन थियेटर (OT) में बुलाया।
हैरानी की बात यह है कि डॉक्टर ने छात्रा के पिता और बहन को साफ तौर पर बाहर जाने को कह दिया।
Operation Theatre का वो डार्क सीक्रेट
ऑपरेशन थियेटर के अंदर, डॉक्टर ने छात्रा को एक नशीला इंजेक्शन (sedative) दे दिया, जिससे वह आधी बेहोशी की हालत में चली गई।
जब वो पूरी तरह से असहाय थी, तब उस तथाकथित डॉक्टर ने उसके साथ रेप जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
होश में आने के बाद जब छात्रा ने अपने परिवार को यह खौफनाक सच बताया, तो अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ।
'आयुर्वेदिक' डॉक्टर और एलोपैथिक सर्जरी?
यह घटना अपने आप में दिल दहला देने वाली है, लेकिन इस केस का सबसे बड़ा और Shocking एंगल कुछ और ही है जो मुख्यधारा की ख़बरों में छुप गया है।
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आदेश के बाद जब जांच शुरू हुई, तो पता चला कि आरोपी डॉ. विजय गिरी के पास दरअसल 'आयुर्वेदिक' डिग्री थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक आयुर्वेदिक डॉक्टर मॉडर्न मेडिसिन (Allopathy) के तहत ऑपरेशन थियेटर कैसे चला रहा था और मरीजों को बेहोशी के इंजेक्शन कैसे दे रहा था?
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की स्पष्ट गाइडलाइन्स हैं कि एक डॉक्टर को उसी पैथी में प्रैक्टिस करनी चाहिए जिसमें उसने ट्रेनिंग ली है। यह क्रॉस-पैथी प्रैक्टिस (Cross-pathy practice) मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।
मेडिकल एथिक्स (Medical Ethics) की सरेआम मौत
NMC की गाइडलाइन्स के मुताबिक, जब भी किसी मरीज को बेहोश (sedated) किया जाता है, तो वहां एक नर्स (Chaperone) का होना अनिवार्य है।
यह नियम सिर्फ यौन शोषण रोकने के लिए नहीं, बल्कि गुड मेडिकल प्रैक्टिस का एक बहुत ज़रूरी हिस्सा है।
लेकिन तेजस अस्पताल में स्टाफ की कमी या मिलीभगत के चलते इस नियम को पूरी तरह इग्नोर किया गया। यह 'Power gradient' का सबसे भद्दा रूप है, जहां एक डॉक्टर ने मरीज की मजबूरी और अपनी पोजीशन का सीधा फायदा उठाया।
आगे क्या होगा?
इस Viral घटना के बाद पूरे इलाके में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। पुलिस ने BNS और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।
सरकार ने भी इस मामले में 'Zero Tolerance' दिखाते हुए कई कड़े कदम उठाए हैं:
- अस्पताल सील: डिप्टी सीएम के सख्त आदेश के बाद तेजस अस्पताल को तुरंत सील कर दिया गया है।
- लाइसेंस सस्पेंड: आरोपी डॉ. विजय गिरी का मेडिकल लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है और उसकी आयुर्वेदिक डिग्री जब्त करने का Process शुरू हो गया है।
- नई गाइडलाइन्स लागू: यूपी सरकार (UP Govt) ने सभी सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों के लिए 21-पॉइंट की नई सुरक्षा गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं।
- CCTV और नाईट पेट्रोलिंग: अब हर अस्पताल में एंट्री-एग्जिट पर CCTV अनिवार्य कर दिया गया है और रात के समय महिला स्टाफ और मरीजों की सुरक्षा के लिए नाईट पेट्रोलिंग और पास सिस्टम लागू किया गया है।
इस घटना ने Health Department की आंखें खोल दी हैं। अब दूसरे प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों में भी हड़कंप मचा हुआ है और उनके दस्तावेजों व लाइसेंस की चेकिंग तेज हो गई है।
आम आदमी के लिए इस कड़े एक्शन का सबसे बड़ा Benefit यह है कि अब ऐसे फर्जी 'क्रॉस-पैथी' डॉक्टरों पर लगाम लगेगी।
साथ ही, उम्मीद है कि अस्पतालों में महिलाओं व दलित/गरीब मरीजों की सुरक्षा का प्रोटोकॉल भविष्य में सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर असलियत में काम करेगा।

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